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(as of Feb 06, 2026 21:56:11 UTC – Details)
कविता विकास की अधिकतर कहानियाँ ‘मैं’ शैली में होती हैं। कहानियाँ पढ़ते हुए ज्ञात होता है कि लेखिका की व्यक्ति, परिवार, समाज पर गहरी आस्था है। इधर जिस तरह विवाह संस्था को खारिज करने की वृत्ति बढ़ रही है, यह जरूरी हो जाता है कि पारिवारिक-सामाजिक संरचना को मजबूती देने तथा परिवार बचाने की बात की जाए। परिवार खत्म होते हैं तो सृष्टि का खत्म होना तय है। परिवार तभी बच सकते हैं, जब पितृसत्तात्मक रवैए की गिरह ढीली हो, पुरुषवादी वर्चस्व निष्प्रभावी हो। लेखिका मुश्किल बुनावट, भाषाई वाग्जाल या शब्दाडंबर जैसी प्रयोगधर्मिता में न पड़ उस भाषा का प्रयोग करती हैं, जिसमें आम आदमी सोचता और बोलता है।
वे सादगी से कहानी को ऐसी गति और विकास देती हैं कि एक सिलसिला, एक श्रृंखला यों बनती जाती है, मानो कहानी लिखने के लिए अतिरिक्त प्रयास नहीं किया गया है। समग्रतः कहा जा सकता है कविता विकास सूझ-बूझ से ऐसे पात्र तैयार करती हैं, जो मर्म को छूते व संवेदना को जाग्रत् करते हैं। कहानियों में व्यक्त असमंजस-अनिश्चय, दृढ़ता-संकल्प, समर्पण-सद्भाव, उत्थान-पतन, अंतर्द्वद्व-अंतर्विरोध, ताप-तनाव, दुःख-दबाव, निराशा-निरपेक्षता, आनंद-अतिरेक, पीड़ा-परिताप, हर्ष उल्लास-उत्कर्ष, कामना-कल्पना, आकांक्षा अनुभव जैसे अनगिन मानवीय भाव उभरते हैं।
Publisher : Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
Publication date : 10 January 2026
Language : Hindi
Print length : 144 pages
ISBN-10 : 9355719493
ISBN-13 : 978-9355719492
Item Weight : 150 g
Dimensions : 22 x 14 x 1.2 cm
Net Quantity : 1 Count
Packer : BestSellingBooks
Generic Name : Book
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